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1.6.21

वर्तमान महायुग की गणना तथा राम की आयु एवं रावण वध का कालखण्ड (Calculation of present Mahayuga and age of Rama and period of Ravana slaughter)

SultaGohr

 

वर्तमान महायुग की गणना तथा राम की आयु एवं रावण वध का कालखण्ड: 

Calculation of present Mahayuga and age of Rama and period of Ravana slaughter:


Image by Pete Linforth from Pixabay

इस ब्लॉग को पढ़ने से पहले पाठकों से विनम्र निवेदन है की वे इससे सम्बंधित पहला ब्लॉग "सृष्टि की उत्पत्ति तथा काल की गणना" अवश्य पढ़ें जिससे इस ब्लॉग में दिए गए तथ्यों को समझने में आसानी होगी।

प्रत्येक महायुग के अंतर्गत चार युगों की गणना होती है क्रमशः सतयुग,त्रेतायुग,द्वापर तथा कलयुग।

सतयुग

वर्तमान अठाईसवें महायुग के अंतर्गत सतयुग का प्रारम्भ कार्तिक शुक्ला पक्ष की नवमी तिथि, बुधवार के प्रथम प्रहर में श्रवण नामक नक्षत्र तथा वृद्धि नामक योग में हुआ था।

जिसकी कुल आयु १७,२८,००० वर्ष रही। इस युग में ईश्वर के चार अवतार हुए जो मत्स्य, कूर्म , वराह तथा नरसिंह  के नाम से जाने जाते हैं। इस युग का प्रधान तीर्थ पुष्कर था तथा धर्म अपने चारों पैरों से घरती पर स्थिर था अर्थात मनुष्य पूर्णतया धर्मपरायण थे तथा धर्म के चारों आयामों/पदों क्रमशः "सत्य, शौच, दया तथा अहिंसा" का पूर्णतया पालन करते थे।

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त्रेतायुग

त्रेता युग का आरम्भ वैशाख  शुक्ल तृतीया तिथि,सोमवार के दूसरे प्रहर में रोहिणी नक्षत्र तथा शोभन नमक योग में हुआ था।  इस युग की कुल आयु १२,९६,००० वर्ष रही। इस युग में भगवान विष्णु के तीन अवतार हुए जो वामन, परशुराम तथा रामचंद्र के नाम से जाने जाते हैं।इस युग का मुख्य तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में धर्म तीन पद पर धरती पर प्रतिष्ठित था।

 

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द्वापरयुग

द्वापरयुग का प्रारम्भ माघ कृष्ण अमावस्य,शुक्रवार के तीसरे प्रहर में घनिष्टा नमक नक्षत्र तथा वरीयान नामक योग में हुआ था।  इसकी कुल आयु ,६४,००० वर्ष थी। इस युग में श्री कृष्ण अवतार हुआ था।  इस युग में धर्म केवल दो चरणों से धरती पर प्रतिष्ठित था। इस युग का प्रमुख तीर्थ स्थल कुरुक्षेत्र था।

 

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कलयुग

वर्तमान युग कलयुग का प्रारम्भ भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी,रविवार को अर्धरात्रि के समय आश्लेषा नमक नक्षत्र तथा व्यतीपात नमक योग में हुआ। इस युग की कुल आयु ,३२,००० वर्ष होगी। इस युग में ईश्वर के दो अवतार मने गए हैं पहला महात्मा बुद्ध जो कलयुग के आरम्भ में हो चुका है।

कलयुग में ईश्वर का दूसरा अवतार श्री कल्कि के रूप में होगा जो कलयुग के अंत में ८२१ वर्ष शेष रहने पर होगा। भगवान कल्कि समस्त संसार से अधर्म और पाप का समूल नाश करके पुनः धर्म की स्थापना करेंगे तथा उसके परिणामस्वरुप तत्पश्चात पुनः सतयुग का आरम्भ होगा।

कलयुग में धर्म केवल एक पद पर ही शेष रह गया है। इस युग का प्रमुख तीर्थ गंगा है।  अभी तक कलयुग के ५११९ वर्ष (सन २०२१ तक) वीत चुके हैं। अभी इस युग के ,२६,८८१ वर्ष बीतने शेष हैं।

 

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राम की आयु एवं रावण वध का कालखण्ड 

Age of Rama and period of Ravana slaughter

द्वापर के ,६४,००० तथा कलयुग के अब तक के ५११९ वर्ष अर्थात कुल ,६९,११९ वर्ष पहले त्रेता युग था। भगवान नारायण के राम के रूप में अवतार लेकर धरती पर रहने की कुल अवधि १६,००० वर्ष निर्धारित थी। श्री राम का वनवास लगभग २१ वर्ष की आयु में हुआ था। वनवास के १४ वर्ष की अवधि के समाप्ति के समय पर उनहोंने रावण से युद्ध करके उसका वध किया था। इससे ज्ञात होता है की ३५ वर्ष की आयु में श्री रामचंद्र ने रावण का वध करके अयोध्या लौटकर  १५,९६५ वर्षों तक राज्य किया तथा तदोपरांत निजधाम चले गये। इस प्रकार रावण का वध आज से लगभग ,८५,०८४ वर्ष पूर्व हुआ था।


24.5.21

सृष्टि की उत्पत्ति तथा काल की गणना

SultaGohr

 

सृष्टि की उत्पत्ति तथा काल की गणना:

सृष्टि की उत्पत्ति एक बहुत ही विरोधाभासपूर्ण विषय है। इस विषय के सम्बन्ध में सभी की अपनी अलग धारणायें, मान्यतायें तथा तथ्य हैं। हम संसार के सभी लोगों की धारणाओं, मान्यतायों तथा तथ्यों का सम्मान करते हैं। जैसे इस विषय के सम्बन्ध में सभी की अपनी मान्यतायें एवं ज्ञान है वैसे ही हम भी अपनी मान्यताओं के आधार पर इस विषय के सम्बन्ध में संक्षिप्त विवेचना कर रहे हैं। किन्तु इसका अर्थ संसार के अन्य लोगों की मान्यतायों, ज्ञान एवं तथ्यों की अवहेलना करना कदापि नहीं है। अतः हम भी आशा करते हैं कि विषय से सम्बंधित हमारी विवेचना को भी सभी सकारात्मक रूप में लेंगे।

भूगर्भ शास्त्र के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति ईसा पूर्व १९,५८,८३,१०० वर्ष पूर्व हुई। इस गणना के  आधार पर आज से १९,५८,८५,१२० पूर्व  माना जा सकता है।

भारतीय ऋषिओं ने काल को युगों में बांटा हुआ है। जिसके अनुसार सतयुग की आयु १७,२८,००० वर्ष है, त्रेतायुग की १२,९६,००० वर्ष, द्वापर की ,६४,००० वर्ष तथा कलयुग की ,३२,००० वर्ष होती है। इन चारों को मिलाकर एक महायुग होता है।

१००० महायुग व्यतीत होने पर ब्रह्मा का एक दिन पूरा होता है। इसी हिसाब से ब्रह्मा की आयु १०० वर्ष होती है।

ब्रह्मा की आयु १०० वर्ष बीत जाने पर एक कल्प पूर्ण होता हैतथा कल्प के अंत में महाप्रलय होकर पुनः नई सृष्टि का निर्माण होता है। यही क्रम सदा चलता रहता है।

वर्तमान काल में ब्रह्मा की आयु के ५० वर्ष व्यतीत हो चुके हैं।

ब्रह्मा के एक दिन में १४ मनु होते हैं तथा एक मनु में ७१ महायुग होते हैं। एक महायुग में ४३,२०,०००  हैं। इन्हें सौर वर्ष वर्ष कहा जाता है।

अभी तक वर्तमान मनु के मनु बीत चुके हैं। मनु को मनवन्तर भी कहा जाता है। सभी मनवन्तरों के भिन्न नाम होते हैं। इस समय वैवस्वत नामक सातवां मनवन्तर चल रहा है। इस मनवंतर के २७ महायुग बीत चुके हैं। वर्तमान में सातवें मनवंतर के अठाईसवें महायुग का अंतिम युग कलयुग चल रहा है।