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20.6.21

वक्रासन Twisted Pose

SultaGohr

 

वक्रासन  Twisted Pose

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वक्रासन में पीठ तथा मेरुदंड मुड़ी हुई (Twisted) स्थिति में होती है। इसलिए इसे वक्रासन Twisted Pose कहा जाता है।वक्रासन एक सरल योग आसन है तथा मधुमेह diabetes  के रोगियों के लिए  लाभप्रद है।

वक्रासन की विधि method of Vakrasana

सर्वप्रथम भूमि पर आसन लगाकर अपने पैरों को फैलाकर बैठें। अपने बाएं पैर को घुटनों से मोड़े और फिर अपने पैर को दाहिने घुटने के पास रखें।साँस छोड़ें और फिर आप अपनी कमर को बाईं ओर मोड़ें और ध्यान रहे की आपकी रीढ़ सीधी रहे।फिर, अपने दाये हाथ को बाईं ओर के पैर की ओर रखे, और आपको इसे इस तरह रखे की दाहिने हाथ की बाहरी तरफ बाएं पैर के बाहरी हिस्से को छूए।अपने बाये हाथ को पीछे ले जाएं और अपनी हथेली को फर्श पर रखे।इसके पश्चात साँस लेते हुए आसन खोलें तथा  विपरीत ओर से फिर से आसन दोहराएं। इस प्रकार दो से तीन बार वक्रासन का अभ्यास किया जा सकता है।

वक्रासन में सावधानी Caution in Vakrasana

यदि पीठ  मेरुदंड  में किसी प्रकार की चोट लगी हो तो  इस आसन का अभ्यास नहीं करे। गर्भावस्था के दो से तीन महीने के बाद वक्रासन का अभ्यास करें। पेट का किसी प्रकार ऑप्रेशन हुआ हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।

वक्रासन में ध्यान meditation in vakrasana

वक्रासन, मत्स्येन्द्रासन से ही सम्बंधित योगासन है जिसमे योगी मच्छेन्द्रनाथ साधना किया करते थे। इसमें कुण्डलिनी के सभी चक्रों  ध्यान लगाया जा सकता है तथा इसमें त्राटक बिंदु पर भी ध्यान लगाया जा सकता है।

वक्रासन के लाभ Benefits of Vakrasana

वक्रासन मेरुदंड तथा पीठ को लचीला बनाता है तथा पीठ की नस नाड़ियों को लचीला बनाकर रक्त प्रवाह को सुचारु करता है।

इससे कमर की अतिरिक्त चर्वी दूर होती है तथा कमर सुंदर एवं सुडौल होती है।

वक्रासन हमारे फेफड़ों के लिए लाभदायक है अतः साँस की पूर्ति तथा गति सुचारु करता है।

वक्रासन  गर्दन में दर्द, पीठ दर्द और सिरदर्द में भी लाभ पहुंचता है।

वक्रासन उन लोगों को लाभ पहुंचाता है जो मधुमेह की समस्या से पीड़ित हैं। जब वक्रासन पेट के अंगों की मालिश का काम करता है जिसमें अग्न्याशय शामिल होता है।

इसके अतिरिक्त वक्रासन गठिया तथा कब्ज़ में भी लाभ पहुंचता है।

वक्रासन मेरुदंड के विकारों तथा गृध्रसी (Sciatica) के दर्द को शांत करने में सहायता करता है।

वक्रासन कन्धों तथा छाती को भी चौड़ा तथा मज़बूत करता है।

 

16.6.21

एकपादासन One Leg Posture

SultaGohr

 

एकपादासन  One Leg Posture

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इस आसन में एक पैर पर खड़े होकर  आसन अभ्यास किया जात है। इसलिए इसे एकपादासन कहते हैं।

प्रयोगविधि Methodology

सर्वप्रथम दोनों पैरों पर सीधे  खड़े हो जाएं। तत्पश्चातू अपने हाथों की सहायता से अपने एक पांव को इतना ऊंचा उठाएं कि उसकी एड़ी दूसरे पांव की जांघ पर जा लगे।

इस स्थिति में सन्तुलन बनाए रखते हुए; अर्थात्एक पांव पर खड़े रहते हुए दोनों  हाथों को जोड़कर प्रार्थना की मुद्रा में रहें।

जब तक पांव पर खड़े रहनें में सफलता मिल जाए तब दूसरे पांव से भी यही क्रिया करें। इसमें शरीर को एकदम सीधा रखना चाहिए।

आरम्भ में इस-स्थिति में अधिक समय तक खड़े रहना सम्भव नहीं होगा, परन्तु निरन्तर अभ्यास से सफलता मिलेगी। तब इस स्थिति में भी तीन मिनट तक खड़े रहे।

आरम्भ में यदि गिरने का भय हो तो इस अभ्यास को किसी दीवार आदि का सहारा लेकर किया जा सकता है। आसन की स्थिति में सामान्य रूप से श्वास लें। यह आसन प्रातः शाम दोनों समय किया जा सकता है।

 एकपादासन में ध्यान  meditation in ekpadasana

यह आसन ध्यान लगाने के लिए एक उत्तम आसन है। प्राचीन ऋषि मुनि तथा योगी  इस आसन में हठ साधना किया करते थे।  मस्तिष्क को एकाग्रचित करके त्राटक बिंदु पर ध्यान लगाया जाता है। 

 लाभ  Benefit

यह आसन शरीर में कांति तथा स्फूर्ति लाता है। इससे मानसिक शांति मिलती है तथा तनाव को दूर करने में सहायता करता है। इस आसन के अभ्यास से स्नायुतंत्र पर प्रभाव पड़ता है।

14.6.21

वकासन Crane Pose

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वकासन  Crane Pose


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इस आसन को करते समय साधक के शरीर की आकृति बगुले की भांति प्रतीत होती है, इसलिये इसेवकासनकहते हैं।

 

प्रयोगविधि Methodology


सर्वप्रथम जमीन पर दरी या कम्बल बिछायें।  फिर उस पर उकड़ूं बैठ जायें। थोड़ा आगे  की ओर झुककर अपने दोनों हाथों को जमीन पर टिका दें।

अब कोहनियों को झुकाकर अपने दोनों घुटनों को ऊपर उठायें, घुटनों को कोहनियों के ऊपर बाजू पर टिका दें।

अब अपने दोनों हाथों और बांहों पर जोर डालते हुए पैरों के पंजों को ऊपर उठाइये। कमर और नितम्बों को जितना ऊपर उठा सकते हैं, उठाइये। अपने सम्पूर्ण शरीर के भार को बांहों पर उठाये हुए घुटनों का भार बांहों पर डालें और श्वास स्वाभाविक रूप से लेते रहें।

इसी स्थिति में तीन-चार सेकेण्ड तक रुके रहने के बाद पूर्व स्थिति में जायें और सम्पूर्ण शरीर को पूर्ण रूप से विश्राम देकर, कुछ सेकेण्ड बाद क्रिया फिर दोबारा आरम्भ कर दें। .पूर्ण अभ्यास हो जाने पर यह आसन दो से तीन मिनट तक लगाया जा सकता है।

 

 वकसान में ध्यान meditation in Vakasana


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यह एक हठ योग आसन है, इस आसन में सिद्ध पुरुष हीध्यानलगा पाते हैं। सामान्य गृहस्थ इतने समय तक इस आसन को लगा ही नहीं पाता कि इसमें ध्यान लगा सके।

 

लाभ Benefit


इस आसन से बांहों, हथेलियों, कलाइयों, कंधों, पीठ आदि की पेशियां लचीली एवं मजबूत होती हैं।

इससे छाती चौड़ी होती है तथा वक्ष सुडौल होते हैं। पेट की चर्वी कम होती है तथा वायु विकार दूर होते हैं।

6.6.21

जानुशिरासन Head-to-Knee Pose

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जानुशिरासन  Head-to-Knee Pose


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इस आसन में सिर को जानु अर्थात घुटनों के साथ मिलाया जाता है इसलिए इसे जानुशिरासन कहते हैं।

 

प्रयोगविधि methodology


भूमि पर आसन लगाकर दोनों पैर सामने की ओर फैलाकर बैठें। अब बाईं टांग के पंजे  को दाईं जांघ के साथ सटा लें तथा एड़ी मूलाधार चक्र के साथ लगनी चाहिए। दाईं टांग सीधी आगे को ही रहेगी। अब रेचक करते हुए आगे की ओर झुकें तथा दोनों हाथों से दाएं पैर के पंजे को पकड़ें। साँस को रेचक करके बाह्य कुम्भक लगाएं। नाक को घुटने के साथ लगाने की कोशिश करें।  आरम्भ में कठिनाई होगी किन्तु आराम आराम से अभ्यास करने से सफलता मिलेगी।  पूरक साँस लेते हुए आसन खोलें।

अब यही आसन विपरीत मुद्रा में फिर से करें अर्थात बाईं टांग को सीधा रहने दें तथा दाएं पैर के पंजे को बाईं जांघ के साथ लगाएं।

सावधानी रखें कि इस आसन को करते हुए कमर धीरे धीरे मोड़ें तथा आरम्भ में सिर को घुटने के साथ लगाने में ज़बरदस्ती करें।

रजस्वला  गर्भवती स्त्रियों को ये आसन नहीं करना चाहिए।

 

जानुशिरासन में ध्यान  meditation in janushirasana

जानुशिरासन में मूलाधार अथवा मणिपुर चक्र पर ध्यान लगाया जाता है।

 

लाभ Benefit

जानुशिरासन में मेरुदंड तथा मेरुरज्जु  मज़बूत एवं लचीले होते है। घुटनों, कमर, पीठ तथा पैर की नसों तथा मांसपेशियों में मज़बूती  आती है।

ये आसन गृध्रसी अर्थात साइटिका sciatica  के दर्द में लाभ पहुंचाता है। इससे वीर्य सम्बन्धी दोष दूर हैं। मधुमेह  Diabetes के रोगियों के लिए लाभप्रद सिद्ध होता है। ये आसन आंतो के दोषों को दूर करने में सहायक है। इससे मोटापा दूर होता है तथा पेट, कमर, जांघों, कूल्हों, भुजाओं को स्वस्थ तथा सुडौल बनाता है।

 

 

Head-to-Knee Pose जानुशिरासन

In this asana, the head is joined with the janu i.e. the knees, hence it is called Janushirasana.

 

Photo by Cliff Booth from Pexels

Methodology

Sit on the ground with both legs stretched out in front. Now bring the toes of the left leg with the right thigh and the heel should be aligned with the Muladhara Chakra. The right leg will remain straight ahead. Now while exhaling, bend forward and hold the toes of the right foot with both hands. Apply external Kumbhaka by exhaling the breath. Try to touch the nose with the knee. There will be difficulty in the beginning, but by practicing with ease, you will get success. Open the posture by inhaling complementary.

Now do the same asana again in the opposite posture, that is, keep the left leg straight and place the toes of the right foot with the left thigh.

Keep in mind that while doing this asana, bend the waist slowly and do not force the head to be with the knee in the beginning.

Menstrual, pregnant women should not do this asana.

 

Meditation in Janushirasana

In Janushirasana, the focus is on the Muladhara or Manipura Chakra.

 

Benefits

In Janushirasana, the spine and spinal cord get strong and flexible. The nerves and muscles of the knees, waist, back and legs get strengthened.

This asana is beneficial in the pain of Sciatica. Due to this asana, the defects related to semen are removed. It proves beneficial for diabetic patients. This asana is helpful in curing the defects of the intestines. It’s helpful in removing obesity and makes the stomach, waist, thighs, hips, and arms healthy and shapely.